हमारे एक मूर्धन्य कवि शमशेर बहादुर सिंह के निजी और पारिवारिक जीवन के बारे में हम बहुत कम जानते हैं। वे इतने संकोची थे कि इस बारे में उन्होंने कभी कोई सूत्र भी हमें नहीं दिये। उनके भाई तेज बहादुर सिंह ने बरसों पहले उनपर जो पुस्तक लिखी थी उसने किसी हद तक उस अभाव की पूर्ति की थी। उस अप्राप्य पुस्तक को दुबारा प्रकाशित करते हुए हमें हर्ष है।